अजब-गजब

पत्थर की चट्टान से बना है एक महाराजा का शिप हाउस

Publish Date: 05-04-2017 Total Views :203

पत्थर

जोधपुर (उत्तम हिन्दू न्यूज): क्या आपने पत्थर की चट्टान पर पत्थर से बना जहाज देखा है या सुना है। यकीनी तौर से आप नहीं ही कहेंगे। लेकिन जोधपुर में रियासतकाल में पत्थर की चट्टान को काटकर महाराजा के निवास के लिए जहाज की सूरत में हाउस बनाया गया था। जिसे शिप हाऊस का नाम दिया गया है। मेहरानगढ़ म्यूजियम ट्रस्ट के महेंद्र सिंह के अनुसार सर प्रताप सिंह कदाचित ही देशी रियासतों के शासक वर्ग में ऐसे पहले व्यक्ति थे। जिन्होंने उस जमाने में शांति और युद्ध दोनों अवसरों पर सबसे अधिक विदेश यात्राएं की थी। तब विदेश यात्राएं पानी के जहाज से ही होती थीं और यात्राओं से प्रभावित होकर ही महाराजा सर प्रताप ने शिप हाउस का निर्माण करवाया था।
    गाइड शक्ति सिंह के अनुसार सर प्रताप ने 1886 ईस्वी में नागौरी गेट के पास एक छोटी पहाड़ी पर शिप हाउस का निर्माण करवाया था। इस शिप हाउस का निर्माण उन्होंने अपने निजी निवास के लिए करवाया था। इसका नक्शा जीजे ओवरीन ने बनाया और राज्य के प्रमुख अभियंता होम के निर्देशन में शिप हाउस बना था। पानी के जहाज के आकार का होने के कारण इस तीन मंजिला कलात्मक इमारत को 'शिप हाउसÓ भी कहा जाता है। निर्माण के बाद सर प्रताप शिप हाउस में रहने भी लगे थे। कुछ समय बाद उनके एक अंग्रेज मित्र ने सलाह दी कि वे इसमें न रहें। क्योंकि जोधपुर में हवा की गति प्राय: पश्चिम से पूर्व की ओर रहती है और ये शिप हाउस नगर की आबादी के पूर्व में है। सारे शहर की प्रदूषित वायु इधर ही आएगी। इस पर सर प्रताप ने शिप हाउस में रहना छोड़ दिया। शिप हाउस में 25 जनवरी 1949 को जोधपुर ब्रॉडकास्टिंग स्टेशन का उद्घाटन किया गया। जो कुछ वर्षों तक चला। यहां प्रख्यात सरोदवादक उस्ताद अली अकबर खां संगीत विभाग और मशहूर शायर रमजी इटावी उर्दू सेक्शन के इंचार्ज थे। आजादी के बाद यहां कई सरकारी विभागों के कार्यालय भी रहे और कुछ फिल्मों की शूटिंग भी हुई।
    भारतीय पुरातत्व विभाग के नियमों के अनुसार शिप हाउस संरक्षित स्मारकों की श्रेणी में आता है। सौ वर्ष से अधिक पुरानी इमारत हैरिटेज संरक्षित स्मारक मानी जाती है और शिप हाउस को बने 127 वर्ष हो चुके हैं। भारत सरकार के राजपत्र के अनुसार प्राचीन संस्मारक और पुरातत्वीय स्थल व अवशेेष (संशोधन व विधि मान्यकरण) अधिनियम, 2010 यथा संशोधित प्राचीन संस्मारक और पुरातत्वीय स्थल व अवशेेष अधिनियम 1958 के प्रावधान के अनुसार प्राचीन स्मारक और संरक्षित स्मारक की 100 मीटर की सीमा के भीतर आने वाला क्षेत्र निर्माण के प्रयोजनों के लिए 'निषिद्ध क्षेत्र' घोषित किया गया है।